शादी की वजह : एक श्रद्धाजंली मुंशी प्रेमचंद जी के लिए

सोमवार, अगस्त 01, 2005

जब मैने अपना पिछला चिठ्ठा लिखा था "एक कुंवारे की व्यथा" ,मुझे याद आ रहा था कि मैने पहले कभी शादी करने की वजहो की एक सुची कहीं पढी है. लेकीन कहाँ और लेखक का नाम याद नही आ रहा था. मै सोच रहा था हो ना हो इस सुची के जनक शरद जोशी जी या परसाई जी होंगे. यदी ये महानुभाव इस सुची के लेखक नही है, तो रवीन्द्रनाथ त्यागी जी होंगे.

मैने सोचा चलो कुछ सोध की जाए. घर (भारत फोन किया), छोटे भाई को अपनी आलमारी खोल कर सभी पुस्तको के सारणी पढने का आदेश दिया. वैसे मेरी उस आलमारी को हमारे कोप के डर से कोई हाथ नही लगाता. मेरे पास हिन्दी साहित्य का एक छोटा सा लेकिन अच्छा संग्रह है. हिन्दी के लगभग सभी नामी साहित्यकारो की प्रतिनिधी रचना उसमे है.
जब मैने भाई को जब "शादी की वजह" ढुंढने का तब उसने मुझसे दोबारा पुछकर अपना शक दुरूस्त किया. वो समझ नही पा रहा था कि "बडे भाई साहब" को अचानक ये क्या सनक सुझी ?

खैर हम दोनो याहु पर आ गये. हम उसे आदेश देते रहे.
हम :"अब शरद जोशी के के खाने देखो"
भाई :"उसमे नही है"
हम: "फिर से एक बार देख, हिन्दी पढना भुल गया क्या ?"
भाई :" एक बार कह दिया ना नही है, विश्वास नही है तो खुद आ कर देख लो !"
हम :"ठीक है, परसाई के खाने की पुस्तके देखो "
भाई :"उसमे भी नही है"
हम :"क्या ? उसमे भी नही है , त्यागी के खाने को देखो"
भाई :"उसमे भी नही है"
हम :"भाई एक काम कर एक एक पुस्तक देखना शुरू कर दे !"
भाई :"मेरे पास उतना समय नही है"
हम :"भाई जरा ये काम कर दे, मै तेरे लिये एप्प्ल आई पोड ले आउंगा!"

बस आई पोड के नाम से भाई ने गूगल की गती से १५ मिनिट बाद हमे बताया "वो सुची मुंशी प्रेमचंद ने लिखी थी".
हमे जोर का झटका और भी जोर से लगा. हमे याद था कि ३१ जुलाई इस महान लेखक का जन्मदिन है. सोचा चलो अपने कुछ चिठ्ठो को "प्रेमचंद जी" के नाम समर्पित कर दिया जाये.

अब आप भी इस सुची (शादी की वजह) को पढीये. टंकण की गलती के लिए क्षमा चाहुंगा.

१—मेरे ससुर एक दौलत मन्द आदमी थे और उनकी यह इकलौती बेटी थी इसलिए मेरे पिता ने शादी की।
२—मेरे बाप-दादा सभी शादी करते चले आए है इसलिए मुझे भी शादी करनी पड़ी।
३—मै हमेशा से खामोश और कम बोलने वाला रहा हूं, इनकार न कर सका।
४—मेरे ससुर ने शुरू मे अपने धन-दौलत का बहुत प्रदर्शन किया इसलिए मेरे मां-बाप ने फौरन मेरी शादी मंजूर कर ली।
५—नौकर अच्छे नही मिलते थे ओर अगर मिलते भी थे तो ठहरते नही थे। खास तौर पर खाना पकानेवाला अच्छा नही मिलता। शादी के बाद इस मुसीबत से छुटकारा मिल गय।
६—मै अपना जीवन-बीमा कराना चाहता था और खानापूरी के वास्ते विधवा का नाम लिखना जरूरी था।
७—मेरी शादी जिद मे हुई। मेरे ससुर शादी के लिए रजामन्द न होते थे मगर मेरे पिता को जिद हो गई। इसलिए मेरी शादी हुई। आखिरकार मेरे ससुर को मेरी शादी करनी ही पड़ी।
८—मेरे ससुरालवाले बड़े ऊंचे खानदान के है इसलिए मेरे माता-पिता ने कोशिश करके मेरी शादी की।
९—मेरी शिक्षा की कोई उचित व्यवस्था न थी इसलिए मुझे शादी करनी पड़ी।
१०—मेरे और मेरी बीवी के जनम के पहले ही हम दोनो के मां-बाप शादी की बातचीत पक्की हो गई थी।
११—लोगो के आग्रह से पिता ने शादी कर दी।
१२—नस्ल और खानदान चलाने के लिए शादी की।
१३—मेरी मां को देहान्त हो गया था और कोई घर को देखनेवाला न था इसलिए मजबूरन शादी करनी पड़ी।
१४—मेरी बहने अकेली थी, इस वास्ते शादी कर ली।
१५—मै अकेला था, दफ्तर जाते वक्त मकान मे ताला लगाना पड़ता था इसलिए शादी कर ली।
१६—मेरी मां ने कसम दिलाई थी इसलिए शादी की।
१७—मेरी पहली बीवी की औलाद को परवरिश की जरूरत थी, इसलिए शादी की।
१८—मेरी मां का ख्याल था कि वह जल्द मरने वाली है और मेरी शादी अपने ही सामने कर देना चाहती थी, इसलिए मेरी शादी हो गई। लेकिन शादीको दस साल हो रहे है भगवान की दया से मां के आशीष की छाया अभी तक कायम है।
१९—तलाक देने को जी चाहता था इसलिए शादी की।
२०—मै मरीज रहता हूं और कोई तीमारदार नही है इसलिए मैने शादी कर ली।
२१—केवल संयाग स मेरा विवाह हो गया।
२२—जिस साल मेरी शादी हुई उस साल बहुत बड़ी सहालग थी। सबकी शादी होती थी, मेरी भी हो गई।
२३—बिला शादी के कोई अपना हाल पूछने वाला न था।
२४—मैने शादी नही की है, एक आफत मोल ले ली है।
२५—पैसे वाले चचा की अवज्ञा न कर सका।
२६—मै बुडढा होने लगा था, अगर अब न करता तो कब करता।
२७—लोक हित के ख्याल से शादी की।
२८—पड़ोसी बुरा समझते थे इसलिए निकाह कर लिया।
२९—डाक्टरो ने शादी केलिए मजबूर किया।
३०—मेरी कविताओं को कोई दाद न देता था।
३१—मेरी दांत गिरने लगे थे और बाल सफेद हो गए थे इसलिए शादी कर ली।
३२—फौज मे शादीशुदा लोगों को तनख्वाह ज्यादा मिलती थी इसलिए मैने भी शादी कर ली।
३३—कोई मेरा गुस्सा बर्दाश्त न करता था इसलिए मैने शादी कर ली।
३४—बीवी से ज्यादा कोई अपना समर्थक नही होता इसलिए मैने शादी कर ली।
३५—मै खुद हैरान हूं कि शादी क्यों की।
३६—शादी भाग्य मे लिखी थी इसलिए कर ली।

2 comments:

अनूप शुक्ला सोमवार, अगस्त 01, 2005 3:08:00 pm  

भइये, ये क्या हो रहा है कि प्रेमचंद वाली पोस्ट पर टिप्पणी चिपक ही नहीं रही है।बहुत बढ़िया लगा बहाने पढ़ना-शादी करने के।एक ये भी जोड़ दो-ब्लागर पीछे पड़े थे कि शादी करके विवाहित
जीवन के अनुभव लिखो सो विवाहगति को प्राप्त हो गया।

Nitin Bagla मंगलवार, अगस्त 02, 2005 4:39:00 am  

अगर दो-चार-छः कारण शादी ना करने के भी बता दें तो बडी महरबानी होगी...मुझ जैसे काफी लोगों की दुआएं भी लगे हाथों मिल जायेंगी ... ;-)

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आशीष श्रीवास्तव
सूचना प्रौद्योगिकी मे 14 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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