न्यु आरलेन्स और मुम्बई

मंगलवार, सितंबर 06, 2005

मै अपने आपको मुम्बई और न्यु आरलेन्स से तुलना करने से रोक नही पाया

१. कुल बारिश
मुम्बई मे (२७ जुलाई) ३७.१ इंच
न्यु आरलेन्स - १८ इंच

२.जनसंख्या
मुम्बई .... १२,६२२,५००
न्यु आरलेन्स .... ४८४,६७४

३.कुल मौत (४८ घन्टो मे)
मुम्बई .....३७
न्यु आरलेन्स ..... १००(?)

४.सुरक्षित बाहर निकाले गये लोग
मुम्बई .....१०,०००
न्यु आरलेन्स ..... उफ ?

५. हिन्सा और गोलीबारी को घटनायें
मुम्बई ..... ०(शुन्य)
न्यु आरलेन्स ..... गिनती नही

६. सेना को घटना स्थल पर पहुंचने मे लगा समय
मुम्बई ..... १२ घन्टे
न्यु आरलेन्स ..... ४८ घन्टे

७. ४८ घन्टे बाद की स्थीती
मुम्बई .....वापिस अपने पैरो पर खडा
५ दिनो बाद तक न्यु आरलेन्स ..... मदद के लिये इ‍तजार, अराजकता, खाना पानी कुछ नही.....

८. सयुंक्त राज्य अमरीका --- विश्व का सबसे ज्यादा अमीर और विकसीत देश
भारत -- एक विकासशिल देश

इस चिठ्ठे से मेरा ये मतलब नही कि भारत आपदा नियत्रंण् मे काफी कुशल है. मेरा ये कहना है कि दुनिया को उपदेश देने वाले अपने गिरेबान मे झांक कर देख ले।

मानवाधिकार के दारोगा को अपने नागरीको के मानवाधिकार नही दिख रहे है, ८ दिन बाद भी पानी पर लाशे तैर रही है।

केन्द्रीय सरकार और सेना राहत कार्य के लिये लिये औपचारिक निमंत्रण का इंतजार कर रही है, जैसे इराकी जनता अमरीका को सद्दाम हुसैन से बचाने के लिए भेजा था !

मैने अपना टी वी बन्द कर दिया है कुछ दिनो के लिये !

14 comments:

Pratik बुधवार, सितंबर 07, 2005 2:24:00 am  

यह तुलना तो वाकई ऑंखें खोलने वाली है। पहली बात तो ये कि हम भारतीय अमेरिका को जितना तीसमारखां समझते हैं, उतना वो है नहीं। और दूसरी बात ये कि हम हिन्‍दुस्‍तान को जितना गया-गुज़रा समझते हैं, हमारी हालत उतनी ख़राब भी नहीं है।

Manoshi Chatterjee बुधवार, सितंबर 07, 2005 3:02:00 pm  

बिल्कुल सही।

--मानोशी

Kalicharan बुधवार, सितंबर 07, 2005 10:54:00 pm  

yeah new orleans - below sea level. Combine that with the fact that new orleans got hurt because of the levys breaking causing the city to flood substantially to 15+ feet of water. Flooding in New Orleans had nothing to do with rains, it was the hurricane. If you really have to blame, blame it on the French for coming up with a city below sea level. Also doesnot help that its in a poor, mostly black state and hence not home to power people. Geez man atleast get your facts right.

Atul Sabnis सोमवार, सितंबर 12, 2005 12:50:00 pm  

भाई आशीष: मेरे मत में तुलना की आव्श्यकता नहीं, दोनों देश अलग है, उनकी-अपनी समस्या एवं स्मस्या के जड़ अलग है।

मेरा चिठ्ठा, “ठेले पे हिमलय” 9वीं या 10वीं कक्षा के हिन्दी के एक पाठ का नाम हैं।
धन्यवाद!

Patali-The-Village बुधवार, मार्च 16, 2011 5:07:00 pm  

बिल्कुल सही। धन्यवाद|

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ शुक्रवार, मार्च 18, 2011 10:49:00 pm  

होली के पर्व की अशेष मंगल कामनाएं। ईश्वर से यही कामना है कि यह पर्व आपके मन के अवगुणों को जला कर भस्म कर जाए और आपके जीवन में खुशियों के रंग बिखराए।
आइए इस शुभ अवसर पर वृक्षों को असामयिक मौत से बचाएं तथा अनजाने में होने वाले पाप से लोगों को अवगत कराएं।

G.N. J-puri रविवार, मार्च 27, 2011 7:33:00 am  

क्या अब भी आप परमाणु रिएक्टरों की निरापदता के प्रति आश्वस्त हैं?

ref: http://indianscifiarvind.blogspot.com/2011/03/blog-post_14.html

BrijmohanShrivastava शुक्रवार, अप्रैल 15, 2011 6:27:00 am  

धन्यबाद वर्ड वेरिफिकेशन कृपया हटादें

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" सोमवार, मई 02, 2011 2:29:00 am  

पोस्ट अच्छी है पर शायद दो जगह पर स्थिति अलग अलग रही होगी ...
खैर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकत है कि एक कारण यह भी है कि न्यू ओरलिंस एक तुलनात्मक रूप से गरीब जनबसती है ... यहाँ का ज्यादातर अमरीकी-अफ़्रीकी जनसमुदाय उतना शक्तिशाली या वित्तशाली नहीं है जितना कि दूसरी जगह के लोग ...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ गुरुवार, मई 05, 2011 2:27:00 am  

बहुत कुछ कहती है यह तुलना। आभार।

---------
समीरलाल की उड़नतश्‍तरी।
अंधविश्‍वास की शिकार महिलाऍं।

हल्ला बोल शुक्रवार, मई 06, 2011 8:33:00 pm  

ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. साथ ही धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.

समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य दे
.
जानिए क्या है धर्मनिरपेक्षता
हल्ला बोल के नियम व् शर्तें

निर्मला कपिला मंगलवार, जून 07, 2011 6:57:00 am  

ये तुलना ही तो हमे चैन से बैठने नही देती। शुभकामनायें।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') गुरुवार, जून 16, 2011 5:04:00 pm  

आशीष जी, आप अंतरिक्ष एवं विज्ञान विश्‍व के द्वारा उल्‍लेखनीय कार्य कर रहे हैं। मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि आप साइंस ब्‍लॉगर्स से भी जुडें। यह मेरे लिए एक व्‍यक्तिगत उपलब्धि के समान होगी।
मैंने काफी जगह आपका मेलआईडी खोजा, पर मिल नहीं पाया। कृपया मेरी मेल आईडी zakirlko@gmail.com पर संपर्क करने का कष्‍ट करें।

सादर
जाकिर अली रजनीश

कुमार राधारमण शुक्रवार, जुलाई 22, 2011 12:47:00 am  

यक़ीन नहीं हो रहा कि जो आप कह रहे हैं,सच है।

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आशीष श्रीवास्तव
सूचना प्रौद्योगिकी मे 14 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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