सफल होंगे तेरे प्रयास

मंगलवार, अप्रैल 18, 2006


दरिया किनारे बैठा
कभी उंचे पहाडो पे
विचरता यह मन सोचता है
क्या है तेरी तलाश
क्या है तेरी तलाश
क्या है जो तु खोजता है
भावनाओं से भरा हर क्षण
कभी आशाओ का प्रतिक
कभी निराशाओ से भरा मन
फिरता है ये चंचल
उस समय के ईंतजार मे
जब मिलेगी तुझे तेरी मंजील
होगा तेरे जिवन मे भी प्रकाश
सामना कर इन कठीनाईयो का
रख अपने पर विश्वास
ये ही नियम है संसार का
कि पतझड के बाद ही आता है
मौसम बहार का
और यही है उसकी रीत
कि हार के बाद आती है जीत
ए मन ! रख सिर्फ ये अहसास
कि तुझमे है आत्म विश्वास
इसलिये सफल होंगे तेरे प्रयास
 इस सप्ताहांत पर मै अपने घर “गोण्दिया” महाराष्ट्र मे था। अपनी पूरानी डायरीयां और कागजात देख रहा था। अचानक एक कागज़ बाहर आ गीरा जिसपर यह कविता लिखी थी।
कविता तो मेरी एक मित्र ने लिखी थी, यह तो मुझे अच्छी तरह से याद है। लेकिन मेरे पास यह कविता क्या कर रही है, समझ मे नही आया। सोचा चलो अपने चिठ्ठे पर डाल दो, कभी वह भटकते हुये आ जाये, तो रहस्य खुल जायेगा।

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3 टिप्पणीयां “सफल होंगे तेरे प्रयास” पर

आपके दोस्त की कविता पसंद आई. अच्छा लिखा है.

समीर लाल द्वारा दिनांक अप्रैल 18th, 2006

कविता कह रही होगी हमारा जन्म सफल हुआ हम दुबारा पढ़े गये।
अनूप शुक्ला द्वारा दिनांक अप्रैल 18th, 2006

SAhi hai baap. U have kept that Kavita habbit still alive. Wk numer. All the best. Ye site kisme banaye hai?
Sandeep द्वारा दिनांक मई 8th, 2006

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आशीष श्रीवास्तव
सूचना प्रौद्योगिकी मे 14 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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