रांग नंबर

सोमवार, जून 05, 2006


रांग नंबर” यह फोन पर वार्ता का सबसे मह्त्वपूर्ण शब्द है। ऐसे तो हमारे फोन इतिहास मे ना जाने कितने रांग नंबर आते है ,लेकिन कुछ रांग नम्बर हमेशा याद रह जाते है…
ऐसा ही एक रांग नम्बर मुझे आया था।

एक घनघोर अंधेरी रात, बारिश हो रही थी और बिजली जा चुकी थी। बिजली जाने पर हमेशा की तरह मै मोमबत्ती ढूंढ रहा था।वैसे भी मुझे मोमबत्ती हमेशा बिजली आ जाने के बाद ही मिलती है। मै मोमबत्ती शोध मुहिम मे व्यस्त था कि मेरा फोन बजा। फोन उठाने पर एक कर्णप्रिय मधुर आवाज आयी

“हैलो, बिजली आफिस ”
 “नही, रांग नंबर”

हमने जवाब दिया और अपनी मुहीम जारी रखी। (कर्णप्रिय, मधूर आवाज ! समझ गये ना ? )
एक बार फिर से घंटी बजी, वही प्रश्न और वही उत्तर। मैने फोन रखा और मुझे मोमबत्ती मिल गयी। लेकिन अब नयी शोध मुहीम; माचिस ढूढनी थी।

फिर एक बार फोन बजा , फिर वही मधुर आवाज ।मैने संयम ना छोडते हुये, उसे उत्तर देने का निश्चय किया।

मै : “हां जी कहिये ?”
वह: “क्या कहिये.. हमारी बिजली चली गयी है?”
मै : “बिजली गयी तो क्या ?”
वह: “तो क्या का क्या मतलब ? आप कर क्या रहे है ?” (तब तक मुझे माचिस मिल गयी)
वह: “अरे सो गये क्या ? हम लोगो को अंधेरे मे रखकर सोने के अलावा आप लोगो के पास कोई और काम नही है क्या ?”
मै : “अभी तो मै माचिस जला रहा हूं”
वह : “क्या ? देखिये। ये आपका रोज का नाटक हो गया है। दिन मे लोड शेडीग और अब रात मे भी !”
मै : “देखिये बहन जी….”
वह : “बहन जी, क्या बात करते है आप ?”
मै : “देखिये आप जो भी कोई है, जो नंबर आपने डायल किया है…”
वह : “वह मुझे कुछ नही मालूम , पहले ये बताईये बिजली कब आयेगी”

वह कुछ सुनने के लिये तैयार नही थी। अब मेरा शैतानी दिमाग जाग गया और मैने भी मौज लेना शुरू किया।

मै : “अच्छा, ये बताईये कब गयी ?”
वह : “सात से आठ के बिच”
मै: “साथ मे कोई था?”
वह : “मतलब ?”
मै: “जब गयी तो कौनसे कपडे पहने हुये थी ?”
वह : “क्या बात कर रहे है आप?”
मै : “क्या उमर होगी उसकी ?”
वह : “दिमाग घूम गया है क्या आपका ?”
मै : “वह तो एक्दम ठीक है, मुझे लगा कि आपके घर का कोई सद्स्य कहीं चला गया है ?”
वह : “बिजली गयी है बिजली”(एक चिढी़ हुयी आवाज, सारी मधुरता गायब)
मै: “ऐसा क्या, आपके बोलने से तो ऐसा लगा कि आपकी सास कहीं चली गयी है।”
वह :“मेरी अभी तक शादी नही हुयी है।”

हूर्रे….बल्ले …. बल्ले…….

मै : “ऐसा क्या, तब तो ये रांग नंबर लग रहा है.. मै तो गुमशूदा विभाग से बोल रहा हूं!”
वह : “रांग नंबर… तो आपने पहले क्यो नही बताया?”

येल्लो और कर लो बात…

वह : “सारी…”
मै : “कोई बात नही, ऐसे ही रांग नंबर लगा दिया किजिये।”
भडाक(फोन पटकने की आवाज आयी)। बिजली भी आ गयी थी !
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एक और किस्सा। पता नही क्यो, मुझे आने वाले अधिकतर रांग नंबर कन्याओं के क्यो होते है?
घंटी बजी, मैने फोन उठाया। आवाज आयी “हैलो सुरेश !” मैने फोन नही रखा, मालूम था कि अधिकतर रांग नंबर दोबारा कम से कम एक बार और आते है।

वह : “हैलो सुरेश !”
मै : “आधा चाहिये या पूरा ?”
वह : “आप कहां से बोल रहे है ?”
मै : “पृथ्वी नामक ग्रह से ”
वह : “हां हां वह ठीक है, लेकिन आप बोल कहां से रहे है?”
मै : “क्या मैडम, आप भी। सभी तो मुंह से ही बोलते है ना !”
वह : “ज्यादा होशियारी मत दिखाओ, आप है कौन ?”
मै : “एक भारतिय प्राणी”
वह : “लेकिन इस प्राणी का कोई नाम तो होगा”
मै : “नाम मे क्या रखा है , शेक्सपीयर ने कहा था”
वह : “तुम सीधे सीधे बताते हो या फोन रखूं”
मै : “ये हुयी ना अकलमंदी की बात,’रांग नंबर’ पर इतनी देर तक बात कर रही थी आप”
वह : “ओह नो,रांग नंबर क्या ?”

अब ऐसे होते है रांग नंबर….
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9 टिप्पणीयां “रांग नंबर” पर
रांग नंबर का चस्का लग गया है तुम्हें। अब कभी सही नंबर लग गया तो बात करने में तकलीफ होगी।
अनूप शुक्ला द्वारा दिनांक जून 5th, 2006

लगता है कि बहुत प्रार्थना करते होगे कि कोई रोंग नम्बर लगे और कोई मधुर आवाज़ में कुछ पूछे. होशियार रहना, कभी कभी पत्नी या प्रेमिका भी रंगीनदिल आदमी की जाँच करने के लिए सहेलियों से फ़ोन करवा देतीं हैं, इसलिए तमीज़ से बात करने में ही भला है!
सुनील द्वारा दिनांक जून 5th, 2006

हा हा मजेदार वाकये थे !
Manish द्वारा दिनांक जून 5th, 2006

मुँह से बोलते हैं क्या ः)) अच्छा लगा
e-shadow द्वारा दिनांक जून 6th, 2006

या ईलाहि, हम ना हुये!!!
विजय वडनेरे द्वारा दिनांक जून 6th, 2006

हा हा हा मज़ेदार लेख है
अब चुटकुला सुनें
पत्नी आधे घंटे तक फोन से लगी रही। पती ने पूछा किसका फोन है? पत्नी ने कहाः रांग नंबर था।
SHUAIB द्वारा दिनांक जून 7th, 2006

दिल्लचस्प वाकिये हैं|
हमारे साथ भी अक्सर ऐसा होता है लेकिन इतनी देर रांग नम्बर को झेलना हमारे बस कि बात नहीं|
rhythums द्वारा दिनांक जून 7th, 2006

दिल्लचस्प वाकिये हैं|
हमारे साथ भी अक्सर ऐसा होता है लेकिन इतनी देर रांग नम्बर को झेलना हमारे बस कि बात नहीं|
संगीता मनराल द्वारा दिनांक जून 7th, 2006

Very interesting Story,
did electrick Lady called has came after that,
Ab kabhi bhi esa phone aye tu kahena telephone exchange se bool laha ho, apna no bataye
Rohit द्वारा दिनांक जून 15th, 2006

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आशीष श्रीवास्तव
सूचना प्रौद्योगिकी मे 14 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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