हिन्दी सुभाषित सहस्र

मंगलवार, अगस्त 16, 2005

१.मनुष्य के लिये निराशा के समान दुसरा पाप नही है,मनुष्य को पापरूपिणी निराशा को समुल हटाकर आशावादी बनना चाहिये ।- हितोपदेश
२.जीवन एक रहस्य है, जिसे जिया न जा सकता है, जीकर जाना भी जा सकता है लेकिन गणित के सवालो की भांति उसे हल नही किया जा सकता. वह सवाल नही- एक चुनौती है, एक अभियान है। -ओशो
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३.शोक मनाने के लिए नैतिक साहस चाहिये और आनंद मनाने के लिये धार्मिक साहस। अनिष्ट की आशंका करना भी साहस का काम है, शुभ की आशा करना भी साहस का काम परंतु दोनो मे जमीन आसमान का अंतर है। पहला गर्विला साहस है, दुसरा विनीत साहस। -किर्केगार्द
४.चापलूसी का जहरीला प्याला आपको तब तक नुकसान नही पहुंचा सकता, जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझकर पी न जाये। -प्रेमचंद
५.गाली सह लेने के असली मायने हैं गाली देने वाले के वश मे न होना, गाली देनेवाले को असफल बना देना. यह नही कि जैसा वह कहे, वैसा कहना। -महात्मा गांधी.
६.जिसका यह दावा है कि वह आध्यात्मिक चेतना के शिखर पर है मगर उसका स्वास्थ्य अक्सर खराब है तो इसका मतलब है कि मामला कहीं गडबड है । -महात्मा गांधी
७.निराशा मुर्खता का परिणाम है। - डिजरायली
८.सत्य को कह देना ही मेरा मजाक का तरीका है। संसार मे यह सबसे विचित्र मजाक है। -जार्ज बर्नाड शा
९.जो जानता नही कि वह जानता नही,वह मुर्ख है- उसे दुर भगाओ। जो जानता है कि वह जानता नही, वह सीधा है - उसे सिखाओ. जो जानता नही कि वह जानता है, वह सोया है- उसे जगाओ । जो जानता है कि वह जानता है, वह सयाना है- उसे गुरू बनाओ । - अरबी कहावत
१०.सबसे अधिक आंनद इस भावना मे है कि हमने मानवता की प्रगति मे कुछ योगदान दिया है । भले ही वह कितना ही कम, यहां तक कि बिल्कुल तुच्छ क्यो ना हो । - डा. राधाकृष्णन
११.झूठे मोती की आब और ताब उसे सच्चा नहीं बना सकती।
१२.सर्दी-गर्मी, भय-अनुराग, सम्पती अथवा दरिद्रता ये जिसके कार्यो मे बाधा नही डालते वही ज्ञानवान (विवेकशील) कहलाता है ।
१३.ज्ञानीजन विद्या विनय युक्त ब्राम्हण तथा गौ हाथी कुत्ते और चाण्डाल मे भी समदर्शी होते हैं ।
१४.यदि सज्जनो के मार्ग पर पुरा नही चला जा सकता तो थोडा ही चले । सन्मार्ग पर चलने वाला पुरूष नष्ट नही होता।
१५.पशु पालक की भांति देवता लाठी ले कर रक्षा नही करते, वे जिसकी रक्षा करना चाहते हैं उसे बुद्धी से समायुक्त कर देते है । महाभारत -उद्योग पर्व
१६.दुष्टो का बल हिन्सा है, शासको का बल शक्ती है,स्त्रीयों का बल सेवा है और गुणवानो का बल क्षमा है ।
१७.दान देने में किसी प्रकार का भय या प्रतिफल की आकांक्षा की भावना हो तो वह दान नहीं है। -रिचर्ड रेनॉल्ड्स
१८. जिसके पास बुद्धि है, उसके पास बल है। बुद्धिहीन के पास बल कहां? -चाणक्य
१९.इस जन्म में परिश्रम से की गई कमाई का फल मिलता है और उस कमाई से दिए गए दान का फल अगले जन्म में मिलता है। -गुरुवाणी
२०.जब तुम दु:खों का सामना करने से डर जाते हो और रोने लगते हो, तो मुसीबतों का ढेर लग जाता है। लेकिन जब तुम मुस्कराने लगते हो, तो मुसीबतें सिकुड़ जाती हैं। -सुधांशु महाराज
२१.विषयों का चिंतन करने वाले मनुष्य की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है। आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है। क्रोध से मूढ़ता और बुद्धि भ्रष्टता उत्पन्न होती है। बुद्धि के भ्रष्ट होने से स्मरण-शक्ति विलुप्त हो जाती है, यानी ज्ञान शक्ति का नाश हो जाता है। और जब बुद्धि तथा स्मृति का विनाश होता है, तो सब कुछ नष्ट हो जाता है। -गीता (अध्याय 2/62, 63)
२२.प्यार के अभाव में ही लोग भटकते हैं और भटके हुए लोग प्यार से ही सीधे रास्ते पर लाए जा सकते हैं। ईसा मसीह
२३.जो हमारा हितैषी हो, दुख-सुख में बराबर साथ निभाए, गलत राह पर जाने से रोके और अच्छे गुणों की तारीफ करे, केवल वही व्यक्ति मित्र कहलाने के काबिल है। -वेद
२४.स्वप्न वही देखना चाहिए, जो पूरा हो सके। -आचार्य तुलसी
२५.कोई भी देश अपनी अच्छाईयों को खो देने पर पतीत होता है। -गुरू नानक
२६.धर्म वह संकल्पना है जो एक सामान्य पशुवत मानव को प्रथम इंसान और फिर भगवान बनाने का सामर्थय रखती है । -स्वामी विवेकांनंद
२७.एक साधै सब सधे, सब साधे सब जाये
रहीमन, मुलही सिंचीबो, फुले फले अगाय । -रहीम

२८.जो रहीम उत्तम प्रकृती, का करी सकत कुसंग
चन्दन विष व्यापत नही, लिपटे रहत भुजंग । -रहीम

२९.रहीमन देखि बडेन को , लघु ना दिजिए डारी
जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारी । -रहीम

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आशीष श्रीवास्तव
सूचना प्रौद्योगिकी मे 14 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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