अनुगुंज २१ : कुछ चुटकुले

सोमवार, जुलाई 17, 2006


लालु और सूअर का बच्चा
लालुजी अपने ड्रायवर के साथ एक बार कार से जा रहे थे। एक गांव से पहले उनकी कार के निचे एक सूअर का बच्चा कुचल कर मर गया। लालुजी दुखी हुये। ड्रायवर को कुछ पैसे दिये और कहा कि “गांव मे जाओ और सूअर के मालिक को मुआवजा दे आओ”
ड्रायवर पैसे लेकर गांव चला गया। एक घंटा बीत गया, दो घंटे बीत गये ड्रायवर वापिस नही आया। लालुजी बैचेनी से टहलते रहे। तिसरे घंटे के आखिर मे ड्रायवर एक बोरा सिर पर लादे आते दिखा। पास आने पर लालुजी ने पूछा “का रे ड्रायबर , अतना देर काहे लगा दिये ? अउर इस बोरा मे का लाये हो”
ड्राववर “इस बोरा मै पैसा है मालिक”
लालु ” क्यो गांव मे का हुवा, तुम्हे अतना पईसा किसने और काहे दे दिया ?”
ड्रायवर “हमको कुछ नाही पता, हम तो गांव मे जाके इतना ही बोला कि हम लालु का ड्रायवर हूं और हमने उ सूअर का बच्चा मार दिया हूं”
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दवा
कुत्ता और पत्नी दोनों के बीमार होने पर एक व्यक्ति दवा खरीदने गया। व्यक्ति ने दुकानदार से कहा, ‘दवाइयों को अलग-अलग लिफाफे में रखकर उस पर लिख दें कि कौन-सी मेरी बीवी के हैं और कौन-सी मेरे कुत्ते की। मैं नहीं चाहता कि दवा बदल जाए और मेरे कुत्ते को कुछ हो जाए।’
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मित्र
रेखा ने अपने पति रोहित से कहा, ‘हमारी शादी में तो आपके बहुत से मित्र आए थे, अब उनमें से कोई नहीं आता।’ रोहित ने कहा, ‘सुख के सब साथी, दुख में न कोय…।’
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पदयात्रा
मत्री जी की पदयात्रा सुबह सुबह एक गांव से गुजरने वाली थी। दोपहर को निरज दिवान जी उस गांव मे भागते हुये पहुंचे और एक व्यक्ति से पोछा ” क्या नेताजी गुजर गये ?” उसने जवाब दिया “काश नेताजी गुजर जाते ?”
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धुलाई
रमेश धोबी को डांटते हुए, ‘एक तो तुमने मेरी पेन्ट गुम कर दी, ऊपर से धुलाई के पैसे मांग रहे हो?’ धोबी ने कहा, ‘साहब, पेन्ट धुलने के बाद गुम हुई थी।’
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स्कूल
कसाई बकरे को लेकर काटने जा रहा था। बकरा चिल्ला रहा था। इसे देख सोहन अपने पिता से बोला, ‘पिता जी, यह बकरा क्यों चिल्ला रहा है?’ पिता ने कहा, ‘बेटा, कसाई इसे काटने जा रहा है।’ सोहन ने कहा, ‘मैंने सोचा यह स्कूल जा रहा है।’
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किराये का मकान
किरायेदार ने मकान मालिक से कहा, ‘भाई साहब, आपने कैसा मकान मुझे किराये पर दिया है, वहां चूहे ही दौड़ते रहते हैं।’ मकान मालिक ने कहा, ‘तो क्या इतने कम किराये में आप घोड़ों की रेस देखना चाहते हैं।’
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प्रेम
कमला ने हरीश से कहा, ‘मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती रमेश।’ हरीश ने कहा, ‘लेकिन मैं रमेश नहीं हरीश हूं।’ कमला ने कहा, ‘सॉरी डार्लिग, मैं भूल गई थी कि आज रविवार नहीं सोमवार है।’ हरीश ने कहा, ‘क्या कहा, सोमवार है? अब मैं चलता हूं, पता नहीं सीमा कब से मेरा इंतजार कर रही होगी।’
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नाम
एक ड्राइवर को तेज मोटर चलाने पर सिपाही ने रोका और डायरी निकालकर पूछा, ‘आपका नाम?’ ड्राइवर ने कहा, ‘मेरा नाम है कपालामत चंद्रा तसकल काततीमयु नाकु दा…।’ सिपाही ने कहा, ‘बस, बस। जाओ, आगे से इतनी तेज गाड़ी मत चलाना।’
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गुस्सा
सोहन ने राहुल से पूछा, ‘यार, तुम्हारी बीवी को जब गुस्सा आता था तो वह काटना शुरू कर देती थी। अब काटती है या नहीं?’ राहुल ने कहा, ‘नहीं।’ सोहन ने पूछा, ‘क्यों, क्या उसे अब गुस्सा नहीं आता?’ राहुल ने कहा, ‘ऐसी बात नहीं है। गुस्सा तो आता है, पर अब दांत नहीं रहे।’
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प्रश्नपत्र
अध्यापक ने परीक्षा से पहले विद्याथियों से कहा, ‘बच्चों, परीक्षा नजदीक है, प्रश्न पत्र छपने के लिए जा चुके हैं। फिर भी अगर किसी को कुछ पूछना हो तो, वह पूछ सकता है।’ सौरभ ने कहा, ‘सर, एक प्रश्न है।’ अध्यापक ने कहा, ‘पूछो?’ सौरभ ने कहा, ‘सर, ये प्रश्नप्रत्र कहां छप रहे हैं।’
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मंहगाई
पिंकी की मां ने डाक्टर से कहा, ‘डाक्टर साहब, पिंकी बढ़ नहीं रही है, इसके लिए कोई दवा बताएं।’ डाक्टर ने दवा के बदले उपाय बताते हुए कहा, ‘इसका नाम बदल कर महंगाई रख लो, फिर इसे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।’
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मौके की तलाश
एक व्यक्ति बहुत देर से एक दुकान का चक्कर लगा रहा था। दुकानदान ने कहा, ‘भाई साहब, आखिर आपको चाहिए क्या?’ व्यक्ति ने कहा, ‘कुछ सामान ले जाने का मौका।’
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दांत में दर्द
सिनेमा हॉल का गेट कीपर दांत के डाक्टर के पास गया। डाक्टर ने पूछा, ‘तुम्हारे कौन से दांत में दर्द हो रहा है?’ गेट कीपर ने कहा, ‘ऊपर की बॉलकानी में दूसरे नंबर के दांत में।’
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फिजूलखर्च
कंजूस पति ने अपनी पत्नी से कहा, ‘तुम फिजूलखर्ची बहुत करती हो। भगवान न करे, यदि मुझे कुछ हो गया तो तुम्हें भीख मांग कर गुजारा करना होगा।’ पत्नी ने कहा, ‘तुम इसकी चिंता मत करो। तुम से मांगते-मांगते मुझे अब भीख मांगने की आदत पड़ गई है।’
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नजर
एक मरीज की आंखे कुछ ज्यादा ही कमजोर थीं। एक भी अक्षर पढ़वा पाने में नाकाम डाक्टर ने हारकर मरीज से आंखों के ठीक सामने थाली अड़ाकर पूछा, ‘क्या यह चीज तुम्हें दिखती है?’ मरीज ने कहा, ‘जी, दिखती है।’ डाक्टर ने पूछा, ‘क्या है?’ मरीज ने कहा, ‘ठीक-ठीक नहीं बता सकता, चवन्नी है कि अठन्नी है।’
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शर्म
मिस्टर वर्मा ने भिखारी से कहा, ‘भीख मांगते हुए तुम्हें शर्म आनी चाहिए। मेरे साथ चलो, मेरे घर काम करना। मैं तुम्हें दस रुपये दूंगा।’ भिखारी ने कहा, ‘अच्छा ठीक है, तुम मेरे साथ बैठ जाओ। मैं तुम्हें बीस रुपए दूंगा।’
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दिल
एक व्यक्ति पायलट के लिए इंटरव्यू देने पहुंचा। इंटरव्यू में उससे पूछा गया, ‘आपका दिल कहीं कमजोर तो नहीं?’ व्यक्ति ने कहा, ‘जी नहीं साहब, मेरा दिल तो इतना मजबूत है कि पिछले तीन सालों ने मुझे तीन-तीन दिल के दौरे पड़े फिर भी मैं जिंदा हूं।’ उस व्यक्ति से फिर पूछा गया, ‘दौरे तुम्हें कब-कब पड़े?’ व्यक्ति ने कहा, ‘जी जब श्रीदेवी, माधुरी और काजोल की शादी हुई थी तब।’
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कैदी
जेलर ने कैदी से पूछा, ‘जेल से छूटने के बाद क्या करोगे?’ कैदी ने उत्तर दिया, ‘जी, जौहरी की दुकान खोलूंगा।’ जेलर ने पूछा, ‘लेकिन जौहरी की दुकान खोलने के लिए इतना रुपया कहां से लाओगे?’ इस पर कैदी ने कहा, ‘जेलर साहब आप भी कमाल करते हैं, किसी जौहरी की दुकान खोलने के लिए तो मुझे सिर्फ एक हथोड़े की जरूरत होगी।’
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रिकार्ड
हरीश ने अपने मित्र से कहा, ‘यार, यह आदमी अपने-आप को जूते क्यों मार रहा है?’ मित्र ने कहा, ‘यह गिनीज बुक में जूते खाने का रिकार्ड अपने नाम करवाना चाहता है।’
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लाल-पीला
बबलू ने राम से कहा, ‘यार, तुम छोटी-छोटी बातों पर लाल-पीले हो जाते हो।’ राम ने कहा, ‘क्या कंरू, मेरा जन्म ही होली के दिन हुआ था।’

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4 टिप्पणीयां “अनुगुंज २१ : कुछ चुटकुले” पर
वाह ! वाह!!
ठहाके दार डरे आप तो.
रवि द्वारा दिनांक जुलाई 17th, 2006

:-D
संजय बेंगाणी द्वारा दिनांक जुलाई 17th, 2006

Thanx for Hansana  
SHUAIB द्वारा दिनांक जुलाई 17th, 2006

[…] चुटकुलों के कुछ मंतव्य ने भी बहुत आनंद प्रदान किया, और हो� ों पर हँसी वापस आई. मिर्ची से� यानी की पंकज भाई . […]
अवलोकन - चुटकुलों की 21 वीं अनुगूंज at अक्षरग्राम द्वारा दिनांक जुलाई 20th, 2006

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आशीष श्रीवास्तव
सूचना प्रौद्योगिकी मे 14 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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