आ धूप मलूं मै तेरे हाथो मे

गुरुवार, दिसंबर 22, 2005



किस्मत ऐसी पायी है कि मुझे अलग अलग जगह भिन्न भिन्न लोगो के साथ काम करने का सौभाग्य मिलता है। एक अलग ही आनन्द आता है । ऐसे भी मै सुचना तकनीक के क्षेत्र मे काम कर रहा हुं, यह एक ऐसा क्षेत्र है कि आप को भारत के हर कोने से आये हुये सहकर्मियो के साथ काम करने का मौका मिल जायेगा, चाहे आप जहां हो।


अब जब ऐसे वातावरण मे काम करते हों जहां अलग अलग संस्कृति और अलग अलग भाषा भाषी साथ हो तब कभी कभी कुछ मनोरंजक परिस्थितियां पैदा हो जाती है।


मै उस समय दिल्ली मे रहता था और गुडगांव मे काम करता था। कंपनी की बस से गुडगांव आना जाना होता था। हमारी बस का ड्राइवर काफी रंगीले मिजाज का हुवा करता था। बस चालू करने से पहले बस का थका हुवा डिब्बा( म्युझिक सिस्टम ) चालू करता था। आम बस ड्राइवरो के जैसे उसके गानो की पसन्द हुवा करती थी। उसका सबसे ज्यादा पसन्दीदा गाना था
चल चमेली बाग मे
मेरे साथीयो मे एक सुबु था, जो मद्रासी(तमील) था। हम लोग बस मे साथ ही बैठा करते थे। सुबु कभी शांत ना बैठने वालो मे से था। उसे हिन्दी नही आती थी, लेकिन दिल्ली मे हिन्दी के बिना जीना मुश्किल है। वह धीरे धीरे हिन्दी सीख रहा था। अब वो काम चलाउ हिन्दी बोल लेता था लेकिन हिन्दी गाने उसके समझ से बाहर थे। मै अक्सर उसे गानो का मतलब भावानुवाद कर बता देता था। लेकिन सुबु भाई अड गये उन्हे भावानुनाद नही हर शब्द का अनुवाद चाहिये जिससे वो अपने हिन्दी का शब्द्कोष बढा सके। वाजिब मांग थी, मै मना भी नही कर सकता था।
अब मेरी परेशानी सुनिये,एक दिन गाना बजा
उड जा काले कांवां तेरे मूविच खंडपावाले जा तु संदेशा मेरा मै सदके जांवा
और हमारा अनुवाद था
“O Black Crow You Fly, I Will Put Sugar In Your MouthTake My Message, I Will Be Gracefull”
सुबु उवाच
 “तुम हिन्दी लोगो का गाना कितना गन्दा, कोइ मतलब का नई। गाने मे कुच बी बोलता। कौवा मेसेज थोडे ले जाता, वो क्या बोलते पिण्जन वो मेसेज ले जाता। तुम लोग कौवा को शक्कर खिलाता, वो कित्ता गन्दा रहता, छे छे…।।”


अब मै सर पिट रहा हुं। बडी मुश्किल से उसे समझाया कि उत्तर भारत मे यदि कौवा मुंडेर पर बोले तो उसे किसी मेहमान के आने का सगुन माना जाता है। उसे मुडेंर और सगुन का भी मतलब समझाया। तब उसकी अकलदानी मे बात आयी।
अगले दिन गाना बजा
आंखो मे क्या जी, रूपहला बादलबादल मे क्या जी, किसी का आंचलआचंल मे क्या जी, अजब सी हलचल
मैने अनुवाद शुरू किया
“What’s in your eye, Silver Cloud”
सुबु उवाच 
“कितना अच्चा लाइन है जे”
“What’s In the Cloud, somebody’s आंचल″
“ये आंचल याने ?”
अब मेरा माथा ठनका,आसपास देखा। और सोचा कि गाने की अगली पंक्ति का यदि अनुवाद किया तो चारो ओर से चप्पले पडेंगी। मैने सुब्बु के हाथ जोडे और कहा 
“मेरे भाई ,रहम कर आगे मै अनुवाद नही कर सकता “
” गन्दा गाना क्या ?, ड्राईवर को समजता नइ क्या, इतना लडकी लोग बैठा फिर बी गन्दा गाना बजाता”
अगले दिन मै पिछे की सीट पर बैठा, सुबु की सीट से ३ कतार पिछे।
गाना बज रहा था


आ सजदा करूँ मै तेरे बातों मे,

 आ धूप मलूं मै तेरे हाथो मे"


अब सुबु बस मे मुझे ढुंढ रहा था, मै बचने की कोशीश कर रहा था। लेकिन उसने मुझे देख लिया। पास आकर शुरू हो गया।
“तुम लोग प्यार मे दुसरो पर थूकता क्या ?”
“अबे ये क्या बोल रहा है ?, पागल हो गया क्या ?”
“ये गाना सुन वो बोलता थूक मलूं मै तेरे हाथो मे “


मेरी समझ मे नही आया कि मै हंसू या रोउं ।
सुबु भाई “धूप” को “थूक” समझ रहे थे।



4 टिप्पणीयां “आ धूप मलूं मै तेरे हाथो मे” पर
बहुत दिलचस्प। फिल्मी गानों को लोग किस तरह उल्टा-पुल्टा सुनते हैं, इस के लिए अपने विनय भाई ने मनबोल नामक साइट बनाई है। धूप मलूँ को थूक मलूँ सुनने वाले और भी हैं।
Raman Kaul द्वारा दिनांक दिसम्बर 23rd, 2005


बहुत ही मजेदार लगा आपका ये संस्मरण।
सारिका सक्सेना द्वारा दिनांक दिसम्बर 23rd, 2005


अच्छा लगा ये सँस्मरण | याद आ गई अपने एक दोस्त की जिन्हे छोटे से शहर मे रहते हुए अँग्रेज़ी फ़िल्में देखनें का बहुत शौक था । जब कभी कोई फ़िल्म लगी बस पहुंच गये देखनें (समझ में आना ज़रूरी नहीं था) ।
एक बार ज़ल्दी में बस पोस्टर देख कर घुस लिये फ़िल्म Jane Anjane (जेन ऐन्जेन) देखनें के लिये । बड़ी निराशा हुई जब अन्दर जानें पर ‘जाने अन्जाने’ निकली ।
Anoop BHargava  द्वारा दिनांक दिसम्बर 24th, 2005


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आशीष श्रीवास्तव
सूचना प्रौद्योगिकी मे 14 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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