रिवर्स इंजीनियरींग

बुधवार, जुलाई 04, 2018

1993: कालेज मे इंजीनियरींग का प्रथम वर्ष। भौतिकी प्रयोगशाला, प्रयोग कांच का रिफ़्रेक्टीव इंडेक्स ज्ञात करना। एक टीम मे चार लोग थे। हम लीडर..
परिणाम पहले से ज्ञात था, उत्तर 1.5 आना चाहिये था। टीम के बाकी लोगो को कहा कि तुम लोग शुरु हो जाओ, हम रीडींग(निरिक्षण) तैयार करते है। रिफ़्रेक्ट्रीव इंडेक्स गणना के सुत्र से उल्टा चलते हुये रीडींग के तीन सेट तैयार कर लिये।
उपकरणो से थोड़ी देर खेल कुद छेडछाड़ की, प्रेक्टीकल जरनल अपडेट किया और प्रफ़ेसर के पास पहुंच गये। प्रफ़ेसर ने रीडींग देखी , परिणाम देखा उसके बाद हम लोगो को देखा। मुसकराये बोले 
"बच्चो तुम जैसे सैकड़ो हर साल मेरे पास आते है। मै भी पूरे ध्यान से, पूरी सतर्कता से प्रयोग करुंगा ना, तो परिणाम इतने सटिक नही आयेंगे। ये रिवर्स इंजीनियरींग भविष्य मे करना, यहाँ पूरे ध्यान से प्रयोग करो।"
हम फ़ंस गये। प्रफ़ेसर ने कहा, चलो हम तुम्हारे साथ आते है। प्रफ़ेसर ने हमारे साथ पूरे फ़ंडे समझाते हुये विधिविधान से प्रयोग कराया। रीडींग के तीन सेट लिये। फ़ार्मूले मे रीडींग डाली, गणना की उत्तर आया : 1.420
1 घंटे का प्रयोग होशियारी दिखाने के चक्कर मे तीन घंटो का हो गया था। प्रफ़ेसर को परिणाम दिखाया। वो फ़िर से मुस्कराये और कहा, बढीया। इस परिणाम मे दशमलव के बाद वाली संख्या तुम लोगो के लिये ही है।
लेकिन हम सुधरे तो नही, लेकिन सावधानी बरतनी शुरु कर दी, अब हम सटीक परिणाम नही लाते थे, उसके आसपास ही लाते थे!

मेरे बारे मे

Ashish Shrivastava
सूचना प्रौद्योगिकी मे 20 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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