बचपन की जितनी धुँधली याद है, मेरे जीवन की सबसे पहली पुस्तक चंदामामा या नंदन ही रही होगी। इसमे से चंदामामा पौराणीक कहानीयों के लिये जानी जाती है, इसकी खासीयत इसके रंगबिरंगे खूबसूरत चित्र होते थे। विक्रम बेताल का परिचय चंदामामा से ही हुआ। चंदामामा ने ही भारत ही नही विश्व की पौराणीक गाथाओं से भी परिचय कराया, जिसमे तमिळ काव्य शिलप्पादिकारम (जिसकी नायिका कण्णगी है), इलियड और ओडीसी भी शामिल है।
इसके दूसरी ओर नंदन थी, परीकथा और जादुई दुनिया वाली बाल पत्रिका। विश्व बाल साहित्य से …
मेरा बचपन किताबो के बीच मे बीता है, खिलौनो से ज्यादा पुस्तको से प्यार रहा। यह एक शिक्षक के परिवार मे आने का असर था, शिक्षक भी ऐसे जो अपने विषय ’गणित’ की पुस्तको को छोड़ हर विषय की पुस्तके पढ़ते थे और हमे भी प्रेरित करते थे।
पापा का असर हम पर होना ही था, उनकी लत विरासत मे हमे भी मिली। सबसे पहली पुस्तक जो मैने पढ़ी वह याद नही है लेकिन वह चंपक, चंदामामा या नंदन मे से ही कोई एक होगी।
चंपक,नंदन, चंदामामा, पराग जैसी बाल पत्रिकाओं से प्रारंभ कर पंचतंत्र, जातक कथाये पढ़ी। यह सब पुस्तके…
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