गहरी नींद सोया था, अलेक्सा ने जगा दिया। तैयार हुए , हल्का गर्म पानी पिया, चाय बनाई और पी।दौड़ने के लिए निकल लिए। फोन में म्यूजिक प्लेयर चालू किया। रात को नुसरत फतेह अली खान सुन रहे थे, वही शुरू हो गए ...ये जो हल्का हल्का सुरूर है ...
सुबह सुबह और सुरूर ... खैर जेब से फोन निकाल कर गाना बदलने का मूड नही हुआ, चलने दिया।हल्का अंधेरा था। पूरब में लालिमा थी , इक्का दुक्का तारे भी दिख रहे थे। याद आया कि कल ही असिमोव की "रोबोट्स ऑफ डॉन" खत्म की है, अगला उपन्यास "रोबोट्स…
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