2001-2002 हम गुड़गांव मे एक कंपनी मे काम करते थे। छोटी कंपनी थी, करीब 400 लोग। साफ़्टवेयर कंपनी और वह समय साफ़्टवेयर सेवा कंपनीओ के लिये सुनहरा समय था। औसत आयु लगभग 22-25 वर्ष।
कंपनी मे माहौल किसी कालेज के जैसे ही होता था। काम के साथ मौज मस्ती खूब चलती थी। महाराष्ट्र से होने के बावजूद भी मेरी एक अच्छी खासी मित्र मंडली बन गई थी, जिसमे कुछ लड़कीयाँ भी थी।
हमारी छवि उन दिनो मे भी एक टेकी, नर्डी बंदे की थी। हमारे क्षेत्र मे कोई भी समस्या का तुरंत हल रहता था हमारे पास, जिससे सारी कं…
एक शाम मैं अपने रूम पर अकेला ही था। बादल घिरे हुये थे। मौसम ठंडा हो गया था। अंधेरा छा रहा था। देखते देखते ही बुंदाबांदी शुरू हो गयी। बालकनी पर खडा बारिश की भटककर आती हुये बुंदो का आनंद लेते हुये रीम झीम बारिश के निनाद का आनंद ले रहा था।
कुछ देर बाद ऐसे ही टीवी चालू किया हिमेश बाबू नाक दबा कर गा रहा था
“एक बार आजा आजा.. झलक दिखला जा……"
गुस्से मे आकर टी वी बंद कर दिया और आकाशवाणी की शरण ली…
विविध-भारती के क्या कहने….. सुभा मुदगल गा रही थी…..
“अब के सावन ऐसे बरसे……”
पूरा म…
“रांग नंबर” यह फोन पर वार्ता का सबसे मह्त्वपूर्ण शब्द है। ऐसे तो हमारे फोन इतिहास मे ना जाने कितने रांग नंबर आते है ,लेकिन कुछ रांग नम्बर हमेशा याद रह जाते है…
ऐसा ही एक रांग नम्बर मुझे आया था।
एक घनघोर अंधेरी रात, बारिश हो रही थी और बिजली जा चुकी थी। बिजली जाने पर हमेशा की तरह मै मोमबत्ती ढूंढ रहा था।वैसे भी मुझे मोमबत्ती हमेशा बिजली आ जाने के बाद ही मिलती है। मै मोमबत्ती शोध मुहिम मे व्यस्त था कि मेरा फोन बजा। फोन उठाने पर एक कर्णप्रिय मधुर आवाज आयी
“हैलो, बिजली आफिस ”
“…
१९९७-१९९८, संगणक अभियांत्रीकी का अंतिम वर्ष। इस समय तक हम डेनिस रिची के परम भक्त बन चुके थे, यशवंत कान्हेटकर हमारे दूसरे देवता थे । ‘सी’ कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा पर मेरा अच्छा खासा अधिकार हो गया था। मै इस भाषा का उपयोग सामान्य प्रोग्रामिंग के अतिरिक्त ,वायरस बनाने, टी एस आर(टर्मिनेट एंड स्टे रेसीडेन्ट प्रोग्राम), सिस्टम प्रोग्रामिंग के लिये भी करता था। यह वह दौर था जब कंप्यूटर प्रोग्रामिंग मेरे लिये एक दीवानगी बन चुकी थी, मैं गर्व से कहता था ‘कंप्यूटर’ मेरा पहला प्यार है।
…
पिछली पोष्ट मे मैने कहा था:
दूसरे दिन मैने संगणक अभियांत्रीकी मे प्रवेश ले लिया और अपने विज्ञान महाविद्यालय को अलविदा कहा । इस दिन एक ऐसी घटना घटी जिसे मैं आज भी नही भुला पाया हूं। ये एक लंबा किस्सा है फिर कभी…।
ये चिठ्ठा वही किस्सा है….
ये पढने के बाद ये तो शर्तिया है कि आप लोग मुझे कोसना शुरू कर देंगे, कुछ गालीयां देंगे, हो सकता है कि कुछ खतरनाक सी टिप्पणियां भी आयें। वैसे मैं इस प्रतिक्रिया के लिये तैयार भी हुं ।
सन १९९४, उम्र लगभग १७ वर्ष । वही किशोरावस्था और युवावस्था …
फटफटीया लिए हुये पूरे छह महीने गुज़र चुके हैं, लेकिन दिल की सबसे बड़ी तमन्ना अभी तक अधूरी है। कल हम हमेशा की तरह पिछली सीट पर अन्ना को बिठाये हुये कार्यालय से अपने दडबे की ओर जा रहे थे । रास्ता वही पुराना था, शोलींगनल्लुर से पुराने महाबलीपूरम मार्ग द्वारा एन आई एफ टी(राष्ट्रीय फैशन तकनीकी विद्यालय) के पास से होते हुये अपने दडबे अड्यार तक। रास्ता अच्छा नही है, गड्डो मे सडक ढूंढनी पड़ती है। लेकिन एन आई एफ टी के पास रास्ता खूबसूरत हो जाता है। अजी नही! गढ्ढे खत्म नही होते, वे तो…
और पढ़ेंदरिया किनारे बैठा
कभी उंचे पहाडो पे
विचरता यह मन सोचता है
क्या है तेरी तलाश
क्या है तेरी तलाश
क्या है जो तु खोजता है
भावनाओं से भरा हर क्षण
कभी आशाओ का प्रतिक
कभी निराशाओ से भरा मन
फिरता है ये चंचल
उस समय के ईंतजार मे
जब मिलेगी तुझे तेरी मंजील
होगा तेरे जिवन मे भी प्रकाश
सामना कर इन कठीनाईयो का
रख अपने पर विश्वास
ये ही नियम है संसार का
कि पतझड के बाद ही आता है
मौसम बहार का
और यही है उसकी रीत
कि हार के बाद आती है जीत
ए मन ! रख सिर्फ ये अहसास
कि तुझमे है आत्म विश्वास
इसलिये सफल होंगे तेरे प्रयास
…
वह अपने अपार्टमेंट की बालकनी मे अकेले खडा़ तारों को घूर रहा था। संजय पीछे कब आया उसे पता ही नही चला।
संजय : "यहाँ अकेले क्या कर रहा है, तू ठीक तो है ना ?"
वह : "सितारों मे अपनी महबूबा ढूंढ रहा हूं! कोई पसंद ही नही आ रही!"
"बातें मत बना, दो दिन से तू उखड़ा - उखड़ा है, सब दिखता है , तू कितने भी ठहाके लगा ले, तेरी आंखे चुगली कर देती है कि तू परेशान है। क्या हुआ बे?"
"अबे रूम मे इतने सारे दुःखी आत्मा पहले से है, देवदास, पंडित और कमलेश पहले से इश्क क…
प्रत्याक्षाजी ने हमारे पुराने जख्म हरे कर दिये। हमने अपनी आधी अधूरी ही सही; दास्तान ए इश्क सुना दी।
बहरहाल हमारी इस कहानी पर काफी सारी टिप्पणियां मिली। आगे लिखने का अनुरोध किया गया।
कल का सारा दिन पूरानी हसीन यादो मे डूबा रहा। कहते है जब हमे हिचकी आती है तो उसका मतलब होता है कि कोई आपको याद कर रहा है। तब तो शायद उसे सारा दिन बिना रूके हिचकी आती रही होगी।
शाम को घर गये। खाना बनाना शुरू किया। रोटियाँ सेकीं। और सब्जी बनाने की तैयारीया शुरू की।
जब मै किसी की याद मे खाना बनाता हु…
प्रस्तावना
प्रत्यक्षा जी ने हमे प्रेम विषय का पंडित समझ लपेट दिया और इस पर कह दिया कि “आदर्श प्रेमिका के गुण” बतायें। शायद उन्होने कबीर की तरह सोचा होगा “ढाई आखर प्रेम का पढे सो पंडित होय”।
हम तो इस प्रेम की जालिम , बेरहम दुनिया मे इतनी ठोकर खा चुके है कि हमारे दिल नुमा प्रेम ग्रंथ के हर पन्ने से सिर्फ आह ही आती है। दिल के इतने टुकड़े हो चुके है जितने जनता दल के भी नही हुये होंगे। फिर भी हमने हिम्मत नही हारी है और लगे हुये हैं।
हसीं हजारो भी हो खडे, मगर उसी पर नजर पड़े
हो जुल्…
एक अकेला इस शहर में, रात मे और दोपहर में।
आबोदाना ढूंढता है, आशियाना ढूंढता है।
आज कल हमे यही गाना गाते हुये अपने लिये नया आशियाना ढूंढ रहे है। ऐसा नही है कि मकान मालिक ने हमे निकाल दिया है लेकिन आसार पूरे है।
वैसे तो हमे चेन्नई महानगर आये हुये पूरे चार साल हो चुके है और हम चार आशियाना बदल चुके है। ये बात और है कि इन चार सालो मे हम चेन्नै मे बामुश्किल कुछ ही महीनों रहे है, बाकी तो यायावर जिन्दगी कभी अमरीका तो कभी यूरोप। पहले ढाई साल तो होस्टल मे काट दिये थे, होस्टल मालिक काफ…
पिछले सप्ताह मे कंपनी के व्यावसायिक कार्य से बैंगलोर जाना हुआ। यों तो काम कम्पनी के एक ग्राहक के कार्यालय मे था, उन्हे अपने कार्यालय के कार्य को स्वचालित करना था, जिसके लिये मुझे उनकी आवश्यकताओ को समझना(Requirement Analysis) था। मतलब यह कि मै “आनसाईट” मे था ,मेरी पूरी टीम चेन्नई मे है यानी कि “आफशोर“। अच्छा रहा यह भी, भारत के अंदर ही “आनसाईट” और “आफशोर”।
एक अरसा हो गया था मौज मस्ती किये हुये। मेरा मौज मस्ती से मतलब होता है, बेफिक्री से बाजार शापिंग-माल मे मटरगश्ती करना, शोर…
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