मेरे प्राथमिक स्कूल का नाम : हिन्दी पूर्व माध्यमिक शाला झालिया महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के चुनिंदा सरकारी हिन्दी माध्यम के स्कूलों मे से एक। अधिकतर स्कूल मराठी माध्यम के हुआ करते थे। यह स्कूल कक्षा 1 से कक्षा 7 तक का(पूर्व माध्यमिक) था। जब तक हम कक्षा पाँच पहुंचे , हर कक्षा मे दो सेक्शन हो गए थे। लेकिन कुल कमरे पाँच ही थे, दो छप्पर मिलाकर भी 7 ही होते थे, कक्षाएं दोगुनी! इसलिए पाठशाला दो पारीयों मे लगने लगी थी। कक्षा 1 से 4 सुबह की पारी में सुबह साढ़े सात से ग्यारह तक, क…
और पढ़ेंदीपावली आ रही है। हम घर पेंट करने में जुटे हुए है। इसके पहले चरण में हमने छत पर डैम्प प्रूफ पेंट किया था।
दूसरे चरण में दीवारों पर से कुछ जगह जहाँ दरारें आई थी, पेंट की पपड़ी बन गई थी, उन जगहों को खरोंच कर साफ किया। पुट्टी लगाई और समतल करने घिसाई की।
तीसरे चरण में सारी छतों पर सफेद पेंट किया। एक पाईप में रोलर बांधा और पेंट बाल्टी में डूबा कर छत पर रोल कर दिया। तीन बेड रूम, तीन बाथ रूम, किचन, डायनिंग हाल, बॉलकनी और मेन हॉल की छत पेंट करने में दो दिन लग गए। पूरा दिन पेंट नही करते…
गार्गी इस वर्ष दूसरी कक्षा मे है, कल उसकी कंप्यूटर विषय की पुस्तक देखी, उसके पाठ्यक्रम मे माइक्रोसाफ़्ट वर्ड और एक्सेल भी है। हम थोड़े चकराये कि ये विषय इतनी जल्दी कैसे? लेकिन जब गार्गी को आसानी से वर्ड मे टाईप कर सलीके से फ़ॉर्मेट करते देखा तो लगा कि नई पीढ़ी तकनीक जल्दी और आसानी से सीख लेती है।
मै स्वयं कंप्यूटर इंजीनियर हुं। कंप्यूटर का प्रयोग करते हुये लगभग एक चौथाई सदी बीत गई है, लेकिन मैने पहली बार कंप्यूटर के दर्शन नौवीं कक्षा मे किये थे। दूसरा दर्शन इंजीनियरींग मे प्रवे…
पिछले चार वर्ष से अर्ध मैराथन मे भाग ले रहा हुं। साल मे कम से कम दो अर्ध मैराथन हो ही जाती है। इससे अधिक कभी कोशिश नही की।
पहली बार अर्ध मैराथन मे 38 वर्ष उम्र मे भाग लिया था, उसके पहले 2015 मे एक बार दस किमी मे भाग लिया था। 2006 मे पहली बार स्पिरिट ऑफ़ विप्रो मे 5 किमी की दौड़ मे भाग लिया था। उसके बाद हर वर्ष 5 किमी वाली श्रेणी मे भाग ले ही लेता था। स्पिरिट आफ़ विप्रो मे 5 किमी वाली श्रेणी दौड़ कम सेल्फ़ीदौड़ होती है, लोग केवल मनोरंजन और दोस्तों, परिवार के साथ टहलते, दौड़ते या …
आज शिक्षक दिन है। आज मै जो कुछ भी हुं, अपने शिक्षकों की दी हुयी शिक्षा के कारण। मेरे इन शिक्षकों मे मेरे स्कूली शिक्षकों के अतिरिक्त हर वह व्यक्ति शामिल है जिससे मैने कोई सबक प्राप्त किया है।
जब भी मै अपने शिक्षकों के बारे मे सोचता हुं, सबसे पहले मुझे याद आते है मेरे अपने पापा, जो स्वयं एक शिक्षक थे। उन्होने ही मेरी औपचारिक शिक्षा का आरंभ अक्षर ज्ञान कराया था। हाथों मे कलम पकड़कर स्लेट पर अक्षर लिखना सिखाया था, उसके बाद होल्डर पेन से कॉपी पर लिखना भी।
मेरा बचपन एक छत्तीसगढ़,…
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