हम सर्वाहारी है। हर वो चीज खा सकते है जो परोसी गई हो। फिर भी अब तक बीफ और पोर्क से दूर रहे है।कारण यही है कि जिस माहौल में पले, बढ़े उसमे ये दोनों चीजे खाने की मनाही थी, वही बाद में रूढ़ी हो गई और इन्हें खाने की कभी इच्छा नहीं हुई, बस कोई विकल्प खोज कर खा लिया।एक लम्बा अरसा विदेशों में बिताया है। इस दौरान अकेला रहा हूं या निवेदिता के साथ, लंच अधिकतर घर से टिफिन में ले जाता रहा हूं।ऑफिस में अधिकतर शाकाहारी लंच ही ले कर जाता रहा हूं। इस दौरान कई बार ऐसा हुआ है कि भारत से कोई …
और पढ़ेंआजकल लगभग रोज हाथी से ऑफिस आ रहे है। बचपन में कभी सोचा नहीं था कि कभी एक क्रूजर जैसी बाइक चलाएंगे, सोचना तो दूर जानते ही नहीं थे कि बाइक के भी प्रकार होते है। होशवाला बचपन 80 के दशक और 90 के दशक के शुरुवात का है, उस समय बाइक मतलब राजदूत और बुलेट! कभी कभार भूले भटके येजदी और जावा दिख जाती थी। हीरो होंडा, टीवीएस सुजुकी और कावासाकी बजाज का ज़माना आया नहीं था। बाइक से सबसे पहला वास्ता 12 की परीक्षाओ में पड़ा था। उस समय हम स्कूल साइकिल से जिला परिषद ज्युनियर कॉलेज आमगांव जाते थ…
और पढ़ेंहमारी सबसे पहली साइकिल पापा की हरक्यूलिस साइकिल थी। जो पापा ने हमारे धरातल पर आने से दो साल पहले 1974 में 60 रुपये में ली थी। पापा इसी साइकल से दो किमी दूर स्कूल जाते थे।
इसी हरक्यूलिस साइकल पर हमने पहले कैंची चलाना सीखा। अगले चरण मे कैंची से डंडे पर बैठ कर साइकिल चलाई। सीट से पैडल तक पैर नही पहुंचते थे तो सीट पर से उचक उचक कर साइकिल चलाई। तब तक यह साइकल कबाड़ा हो चुकी थी।
1986-87 में पापा ने इस साइकल को बेचकर साबू साइकिल खरीदी। अंजाना सा ब्रांड था लेकिन साइकिल फ्रेम पर आठ स…
कल आफीस मे बैठा काम कर रहा था, ज्यादा काम नही था, थोड़ा बोर हो रहा था। इतने मे फोन की घंटी बजी, दूसरी ओर से एक मधूर आवाज आयी।
"सर हम लेना-देना बैंक से बोल रहे है। क्या आप हमे दो मिनट का समय दे सकते है?"
हम समझ गये कि ये महोदया या तो हमे लोन देगी या क्रेडिट कार्ड। दोनो की हमे आवश्यकता तो नही है लेकिन बोर हो ही रहे थे, बतियाने मे कोई हर्ज नही था।
"दो मिनट, अजी आप पूरा घंटा लीजिये, हमे कोई परेशानी नही है जी!"
वो थोड़ा हड़बड़ा गयी "ह्म्म म म, सर आपके लिये ह…
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