चाय पुराण

मंगलवार, फ़रवरी 16, 2021


हाल ही मे एक शादी मे गया था, तीन दिन की घुमक्कड़ी मे कुल मिलाकर छह कप चाय पी गई। खुद पर आश्चर्य हुआ कि एक समय ऐसा था कि ठंड के दिनो मे शादी/ब्याह या घुमक्कड़ी के समय एक दिन मे ही दर्जनो कप चाय पी जाते थे।


बचपन मे 10 वी तक एक दिन मे दो कप चाय मिलती थी, एक सुबह और एक दोपहर मे, वह भी यदि चाय के समय पर घर पर हो तो। यदि किसी दोस्त के घर गये तो कभी कभी तीसरा कप भी हो जाता था।  बाद मे जब 11 वी/12 वी मे साईकिल से 8-10 किमी आमगांव जाना होता था, तो दोपहर मे मित्रों के साथ एक दो कप और हो जाती थी। इन दिनो पूरा हिसाब रखते थे कि कल मैने पैसे दिये थे, आज तू दे...


यही दिन मे तीन चार कप का किस्सा कालेज के दिनो मे भी चला। कालेज के दिनो के बाद जब नौकरी करने लगे, रेल/बस यात्राये बढ़ गई तो चाय की मात्रा मे आश्चर्यजनक रूप से बढोत्तरी हो गई। एक दिन मे चाय की मात्रा आठ दस कप तक पहुंच गई। कभी कभी तो 15-16 कप भी। इन्ही दिनो पैसो की समस्या भी नही रही, खुद ही कमाने लगे थे तो शीतल पेय की संख्या जो किसी समय महीने दो महीने मे एक होती थी, अब रोजाना एक-दो पर आ गई थी। कभी कभी एक दिन मे तीन चार भी।


विदेश यात्राओं का दौर शुरु हुआ। विदेश यात्राओं मे चाय की जगह काफ़ी ले लेती। कप की जगह लोटा भर काफ़ी.. दिन मे तीन चार बार...


शादी हुई। चाय की मात्रा कम होने की बजाय बढ़ गई। अब रात के खाने के बाद भी चाय की आदत हो गई।


इन्ही दिनो शादी के बाद छुट पुट  विदेश यात्राओं से तंग आकर लंबी विदेश यात्रा पर निकल गये। अब घर मे चाय और बाहर लोटा भर काफ़ी। दिन मे तीन चार कप चाय, दो तीन लोटा काफ़ी और एक देड़ लिटर शीतल पेय...


अमरीका , यूरोप से तंग आकर जब आस्ट्रेलिया गये, तो ग्रीन टी और गर्म चाकलेट भी जुड गया, मात्रा नही बढ़ी। बस दिन के किसी एक चाय के कप की जगह ग्रीन टी आ जाती, किसी काफ़ी के लोटे का स्थान गर्म चाकलेट ले लेती। लेकिन आस्ट्रेलीया मे शीतल पेय पीना अचानक कम हो गया, बिना किसी कारण के


भारत वापिस आये, सोचा। वजन 90 किलो के आसपास था। वजन कम करने के लिये व्यायाम के साथ, खाने पीने की आदतों मे बदलाव लाया गया। सोचा कि चलो अगले तीन महीने शर्करा पूरी तरह से बंद कर दी जाये। चाय के कप की मात्रा दिन मे दो कप कर दी गई। कभी कभी चाय की जगह काफ़ी का कप ले लेता। शीतल पेय पूरी तरह से बंद।


अब चार पांच वर्ष हो गये है। दिन मे दो तीन कप से अधिक चाय या काफ़ी नही होती। इच्छा ही नही होती। शीतल पेय का तो ये हाल है कि साल मे एक दो से अधिक नही पी है।


बहुत से लोगो से सुना है कि उन्हे चाय ना मिले तो सरदर्द होता है या पेट साफ़ नही होता है, वगैरह। मैने दिन के दर्जनो कप से दो कप तक ले आया। कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि पूरे दिन चाय नही पी, इस तरह की कोई समस्या नही आई।


हाँ, इन दिनो  सप्ताह मे पांच छः बार नारियल पानी पी जाते है, बस इस चक्कर मे कभी कभार निक्कर की बली चढ जाती है। नारियल खुद ही जो तोड़ लाते है ...

मेरे बारे मे

Ashish Shrivastava
सूचना प्रौद्योगिकी मे 20 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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