कोरोना और बाबा जी की दवाई

मंगलवार, जून 30, 2020

गुणीजनों, प्रवचन आरंभ करने से पहले कुछ आवश्यक व्याख्या
  1. व्हाटाबाउटइज्म : जब बात केले की हो तो आम को ले आना। पुछना कि तब कहाँ थे ? या तब क्यों नही बोले ? फ़लां के बारे मे क्यों नही बोले!
  2. बाबा का अर्थ योग नही होता ना ही आयुर्वेद होता है। बाबा के दावों का विरोध का अर्थ योग, आयुर्वेद, देश, संस्कृति, परंपरा का विरोध नही होता है।

बाबा ने कोविड-19 के शतप्रतिशत इलाज के दावे के साथ बाजार मे दवा उतारी है। दावे की प्रामाणिकता मे ढेरों संदेह है, जिनका निराकरण आवश्यक है। लेकिन गुणीजन व्हाटाबाउटइज्म पर आ गये। कुछ कहने लगे कि रेमडेसिवीर, फ़ैब-फ़्लु, हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन पर क्यों नही बोले, कुछ कहने लगे कि गोरे बनाने की क्रीम पर क्यों नही बोले, हमदर्द साफ़ी, रुह-अफ़्जा पर क्यों नही बोले।
हे विद्वानों, पहले चर्चा करते है रेमडेसिवीर, फ़ैब-फ़्लु ,हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन जैसी दवाओं की।
  1. ये दवाये, आज कल मे नही खोजी गई है, बरसो पुरानी दवाये है।
  2. ये सब दवायें वर्षो तक चलने वाली क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया से गुजर चुकी है, हजारो लोगो पर इनके प्रभाव को देखा गया है।
  3. इन सभी दवाओं की कार्यप्रणाली, प्रभाव और दुष्प्रभाव अच्छी तरह से ज्ञात है।
  4. इनमे से कोई भी दवा OTC नही है, अर्थात इन्हे डाक्टर की पर्ची पर, चिकित्सीय निगरानी मे ही लिया जा सकता है।
  5. इन दवाऒं को कोविड-19 के इलाज के रूप मे प्रचारित नही किया जा रहा है, कोविड-19 के इलाज के लिये क्लिनिकल ट्रायल हो रहा है। इनमे से ग्लेन्मार्क की दवा फ़्लु जैसे लक्षणो के इलाज मे प्रयोग मे आती है।
  6. लेकिन कोविड 19 पर इन दवाईयों के प्रभाव के बारे मे अधिक नही पता है, चुनिंदा मामलो मे क्लिनिकल ट्रायल हुआ है। इसी ट्रायल के एक चरण के रूप मे भारत मे भी इन दवाओं को चुनिंदा मामलो मे डाक्टरों की निगरानी मे ट्रायल के लिये अनुमति मिली है।
  7. बिंदु क्रमांक 4,5,6 को दोबारा पढ़े।

अब आते है, गोरे बनाने क्रीम पर क्यों नही बोले, हमदर्द साफ़ी, रुह-अफ़्जा पर
  1. क्या आप सचमे गंभीर है या केवल बाबा के दावे के उल्टे-सीधे बचाव के लिये लगे हुये है?
  2. ये सब दवाये नही है, हो सकता है कि इन सबके दावे गलत हों, लेकिन क्या इनकी तुलना कोविड-19 जैसी उच्च मृत्यु दर वालीे बीमारी की शतप्रतिशत इलाज के दावे वाली दवा से कर सकते है ?

तो गुणीजनों तो आगे क्या हो ?

बाबा की दवा के बाजार मे आने से पहले वह भी क्लिनिकल ट्रायल से गुजरे। बाकायदा उचित लायलेंस के अंतर्गत उत्पादन हो। कोविड-19 जैसी बीमारीयों के इलाज के लिये प्रयोग चिकित्सीय निगरानी मे ही हो। उसके बाद की उसका प्रचार प्रसार हो।
बाकि आपकी अपनी शृद्धा, आपका जीवन आपकी मर्जी कि आप क्या खायें, कौन रोक सकता है।

-इति श्री गुरुघंटाल बाबा श्री श्री 1680 श्री आशिषानंद प्रवचनामृत

डिस्क्लेमर : बिल गेट्स या बड़ी फ़ार्मा कंपनीयों ने हमे चंदा नही दिया है, दे दे तो मना नही करेंगे। बाबा से भी चंदे का स्वागत है, लेकिन पोस्ट वापस नही लेंगे।

मेरे बारे मे

Ashish Shrivastava
सूचना प्रौद्योगिकी मे 20 वर्षो से कार्यरत। विज्ञान पर शौकीया लेखन : विज्ञान आधारित ब्लाग विज्ञान विश्व तथा खगोल शास्त्र को समर्पित अंतरिक्ष । एक संशयवादी(Skeptic)व्यक्तित्व!
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